Complete Ramayan Story In Hindi | सम्पूर्ण रामायण कथा हिंदी में.

Ramayan Story In Hindi
Ramayan Story In Hindi

Complete Ramayan Story In Hindi सम्पूर्ण रामायण कथा हिंदी में। यदि हिन्दू धर्म के ह्रदय में सबसे अधिक आस्था या विस्वास किसी के लिए हैं तो वह मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और माता सीता के लिए हैं।

रामायण ग्रन्थ के द्वारा हमें श्री राम के आदर्श जीवन के बारे में जानकारी उपलब्ध होती हैं। श्री राम के जीवन चरित्र का बड़ा ही सुन्दर वर्णन उन्ही के काल में हुए महर्षि वाल्मीकि ने अपनी कालजयी रचना रामायण में की हैं। रामायण लगभग प्रत्येक हिन्दू धर्म के लोगो के घर में रहता हैं और उसको पढ़ा जाता हैं। Ramayan, Ramayan Ki Kahani

Complete Ramayan Story In Hindi  - 

 तो चलिए सबसे प्रिये भगवान् श्री राम चंद्र के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं और उनके जीवन चरित्र को थोड़ा और नजदीक से देखते हैं और उनसे सिख लेते हैं तो चलिए शुरू करते हैं -


अथ श्री रामायण कथा हिंदी में 

बहुत समय पहले की बात हैं आज से लगभग 9 लाख वर्ष पहले त्रेतायुग में  एक बहुत ही प्रतापी सूर्यवंशी राजा दशरथ हुआ करते थे। उनके राजधानी का नाम अयोध्या था। राजा दशरथ बहुत ही न्याय प्रिये और धर्मी राजा थे। उनके राज में सभी प्रजा सुख पूर्वक अपना जीवन-यापन करती थी।

महान प्रतापी सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र और माता गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने वाले यशश्वी राजा भागीरथी राजा दशरथ के पूर्वजो में से एक थे।  

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राजा दशरथ अपने पूर्वजो की तरह ही धर्म कार्य में बड़े संलग्न रहते थे। राजा दशरथ की कोई संतान नहीं था जिससे वो अक्सर दुखी रहते थे। राजा दशरथ की तीन रानियाँ थी।

पहली रानी का नाम कौसल्या दूसरी रानी का नाम सुमित्रा तथा तीसरी रानी का नाम कैकेयी था। राजा दशरथ एक महान धनुर्धारी थे वो शब्दभेदी बाण चलाने में माहिर थे वो सिर्फ शब्द की आवाज सुन कर बिना लक्ष्य को देखे उसे भेद सकते थे।

भगवान् श्री राम का जन्म Ramayan Story 

बहुत समय तक राजा को कोई संतान उत्पन्न नहीं हुआ इस बात की चिंता राजा दशरथ के मन में हमेशा रहती थी। एक दिन इसी चिंता में डूबे थे जो राजगुरु वशिष्ठ ने दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ कराने का सुझाव दिया। शृंगी ऋषि के देख-रेख में उन्होंने ही यह यज्ञ संपन्न कराया।

इस यज्ञ में खूब दान-उपदान हुआ इस यज्ञ से प्राप्त खीर को तीनो रानियों को खिला दिया गया। कुछ समय पश्चात् तीनो रानियों के चार पुत्र हुवे। सबसे बड़ी महारानी कौसल्या के राम, कैकेयी के भरत और सुमित्रा के लक्षमण और शत्रुधन हुए। चारो भाई बहुत ही सुन्दर और तेजस्वी थे। महाराज दशरथ अपने चारो पुत्रो को देख कर बहुत खुश होते थे। संतान सुख प्राप्त होने पर राजा दशरथ फुले नहीं समाते थे।

कुछ समय पश्चात चारो भाई राजगुरु वशिष्ठ के साथ जंगल में विद्या ग्रहण करने चले गए। वशिष्ठ बहुत ही विद्वान् गुरु थे उस समय में वशिष्ठ ऋषि का बहुत मान-सम्मान होता था। सब भाई बड़े ही विलक्षण प्रतिभा धनि थे।

लक्षमण जी थोड़े चालु तो भगवान् श्री राम शांत और गंभीर स्वभाव के थे। चारो भाई पढ़-लिखने में भी बहुत होशियार थे। शीघ्र ही उन्होंने बाण चलाना आदि युद्ध-विद्याएँ सिख लीं।

पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या वापसी
पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या वापसी

ताड़का और उसके पुत्रो का वध

अयोध्या की जनता इनके रूप और गुणों पर मुग्ध थी। राजा दशरथ इन्हें कभी अपनी आँखों से दूर नहीं रखना चाहते थे। एक दिन बहुत ही बड़े विद्वान् और ज्ञानी महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ जी के पास आये। ये अपने समय के बड़े महान और तपस्वी ऋषि थे। कई राक्षस इनके यज्ञ में विघ्न डाला करते थे। जब उन्होंने राम तथा उनके भाइयों के बारे में सुना, तब ये दशरथ जी के पास गये।

इन्होने दशरथ से राक्षसों को मारने के लिए तथा यज्ञ की रक्षा करने के लिए राम तथा लक्ष्मण को माँगा। राजा दशरथ ने हाथ जोड़कर ऋषि विश्वमित्र से कहा - 'हे ऋषि ! राम और लक्ष्मण दोनों अभी बालक हैं इतने बड़े-बड़े राक्षसों से युद्ध के लिए उन्हें मत ले जाइये मैं अपनी पूरी सेना और खुद स्वयं चलता हूँ और उन राक्षसों के साथ युद्ध करूँगा और आपके यज्ञ की रक्षा भी करूँगा।'

 राजा दशरथ ने पहले तो अपने पुत्रो को उनके साथ भेजना नहीं चाहा, फिर राजगुरु वशिष्ठ जी के समझाने पर वे भेजने  तैयार हो गए। राम और लक्ष्मण दोनों ऋषि विश्वामित्र के साथ चल दिए। रास्ते में ऋषि ने उन दोनों को दो मन्त्र सिखाये। इन मंत्रो के सिखने के बाद दोनों राजकुमार और शक्तिशाली हो गए। ऋषि के आश्रम में जाते हुवे इन्होने ताड़का नामकी राक्षसी  डाला। 

वहाँ पहुंचकर यज्ञ की रक्षा करते समय उसके एक पुत्र मारीच को बाण मारकर सौ योजन समुद्र के पार फेंक दिया और दूसरे पुत्र सुबाहु को भी मार डाला। अब विश्वामित्रजी का यज्ञ बहुत अच्छी तरह और खूब शांति से संपन्न हो गया। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों राम और लक्षमण को लेकर मिथिलापुरी पहुँचे। 

श्री राम द्वारा शिव धनुष को तोडा जाना

मिथिला के राजा जनक बड़े विद्वान् तथा साधू पुरुष थे। इन्होने अपनी पुत्री सीता का स्वयंवर रचा था। दूर-दूर से राजा-महाराज स्वयंवर में आये खूब धूम-धाम हो रही थी। जब विश्वामित्र जी वह पहुँचे तब राजा ने उनका बड़ा स्वागत किया।
राजा जनक के पास एक धनुष था। यह धनुष शिव जी का था, इस धनुष से उन्होंने त्रिपासुर का वध किया था। इसे सीताजी को छोड़कर कोई भी नहीं उठा सकता था; क्युकी यह बड़ा भारी और कठोर था। राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी जो कोई इस धनुष को उठाकर उसकी रस्सी बांध देगा उसी के साथ सीताजी का व्याह होगा।

माता सीताजी के विवाह हेतु स्वयंवर का आयोजन किया। पुरे आर्यव्रत के बड़े-बड़े शूरवीर योद्धाओं को बुलाया गया था।  रावण भी उस आयोजन  सम्मिलित हुआ था। सब राजाओ ने बड़ी कोशिश की, किन्तु कोई भी इसे हिला भी नहीं पाया उठा कर रस्सी बंधाना तो दूर। 

सभी राजा हार मान चुके थे। राजा जनक को चिंता होने लगी की अब  कहाँ अपनी सुपुत्री के सुपात्र वॉर खोजू। तभी महर्षि विस्वामित्र ने राम को धनुष उठाकर उसपर प्रत्यंचा चढाने का आदेश दिया। गुरु की आज्ञा पाकर राम धनुष के पास पहुँच गए और उन्होंने बड़ी  सरलता से उस धनुष को उठा लिया और उस पर प्रत्यंचा चढाने लगे। धनुष डोर बांधने के दौरान श्री राम के हाथो वो धनुष टूट गया। 

Ramayan Story In Hindi
Ramayan Story In Hindi 

परशुराम जी का क्रोध 

चुकी धनुष शिवजी का था  समय भगवान् शिव के परम भक्त भगवान् परशुराम भी थे। धनुष के टूटने की आवाज सुनकर परशुराम जी वहॉं पहुँच गए। वह बड़े क्रोध में थे। वह इस धनुष को तोड़ने वाले को खोजने लगे। भगवान् परशुराम के क्रोध को देख कर सारा सभा में सन्नाटा छा गया। डरके मारे कोई भी नहीं बोल रहा था। लेकिन लक्ष्मण जी नहीं डरे वो परशुराम जी से वाद-विवाद करने लगे जिससे परशुराम जी का क्रोध और बढ़ने लगा।

लेकिन श्री राम ने बड़ी सज्जन्नता से हाथ जोड़ कर निवेदन पूर्वक भगवान् परशुराम से गलती से धनुष टूट जाने की बात कही और उनसे क्षमा माँगा।  राम के सरल शांत स्वभाव को देखकर भगवान् परशुराम का क्रोध शांत हुआ और वो वहाँ से चले गए। उनके जाने के ठीक बाद सभा में सबने राहत की साँस ली।

भगवान परशुराम के जाने के बाद राजा जनक महर्षि विश्वामित्र के पास गए और उनसे पूछा - 'हे ऋषि ! ये रूप के राजा ये दोनों युवक कौन हैं इनके बारे में बताने कष्ट करें।' ऋषि विश्वामित्र ने राजा जनक को बताया - ये दोनों भाई राम और लक्षमण हैं ये दोनों अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र हैं।

राजा दशरथ के चार पुत्रो में राम जिन्होंने धनुष तोडा वह सबसे बड़े हैं।' ऋषि द्वारा श्री राम का परिचय सुनने के बाद उनके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी सीता सहित अपनी चारो पुत्रियों का विवाह राजा दशरथ चारो पुत्रो से करने का निश्चय किया। 


Ramayan Story In Hindi - चारो भाइयों का विवाह 

राजा जनक ने चारो के विवाह के लिए  महर्षि से निवेदन किया महर्षि ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। उसके बाद राजा जनक के दरबार में खुशियाँ मनाई जाने लगी मिठाइयाँ बाँटे जाने लगे ढोल-नगाड़ा बजने लगा। ऋषि ने यह शुभ सन्देश अयोध्या में भेजवा दिया। अयोध्या में राजा दशरथ ने समाचार सुनते ही पुरे अयोध्या को सजाने का और प्रजा  उपहार बाटने का आदेश दिया।  Ramayan Story With Pictures.

समूची अयोध्या ने अपने राजकुमारों के विवाह की खुशियाँ मनानी शुरू कर दी। राजा दशरथ ने अपने पुत्रों के बारात की तयारी शुरू कर दी। कई सहस्त्र हाथियों को सजाया गया, शतको रथ तैयार किये गए। पूरा अयोध्या नगर बारात में मिथिलापुर पहुँचा।  मिथिलापुर राजा जनक ने बारात  तैयारी में कोई कमी नहीं थी आगे बढ़ कर बारात का स्वागत किया राजा दशरथ से गले मिले और उनका खूब आदर-सत्कार किया। 

भगवान् राम विवाह में सभी अयोध्या वासी झूम रहा था गा रहा था। पुरे आर्यव्रत में जश्न का माहौल था स्वर्ग से देवता पुष्प वर्षा करने लगे। चारो भाइयों का विवाह बड़ी धूम-धाम से हुआ। रामायण कथा हिंदी

श्री रामचंद्र जी का विवाह माता सीता के साथ , लक्षमण जी का विवाह माता उर्मिला के साथ, भरत जी का विवाह माता मांडवी के साथ और शत्रुधन जी का विवाह माता श्रुतिकीर्ति के साथ संपन्न हुआ।

श्रीराम चंद्र जी का राज्याभिषेक - रामायण कथा हिंदी

विवाह के बाद राजा दशरथ सबके साथ वापस अयोध्या आ गए। राजा अब सुखी-सुखी राज करने लगे। समय बीतता गया और राजा दशरथ अब वृद्ध रहे थे। उन्होंने रामचंद्र जी को राजयकार्य देकर स्वयं तपस्या करना चाहते थे। गुरु वशिष्ठ जी के कहने पर एक शुभ दिन श्री  राम जी के राज्याभिषेक करने के लिए निश्चित किया गया।  Ramayan Story, रामायण कथा हिंदी।

सारी प्रजा को जब खबर मिली की श्री राम उनके राजा बनने वाले हैं तो सभी प्रजा को ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। खूब ख़ुशी मनाई जा रही थी। हर तरफ खुशियों  माहौल था सबके चेहरे पर हँसी बिखरी हुई थी सब कोई महल को सजाने में और राज्याभिषेक की तैयारियों में बड़े जोर-शोर से लगा हुआ था।

इन सभी चेहरों में एक ऐसा चेहरा था जिस पर बहुत दुःख और बदले का भाव स्पष्ट नजर आ रहा था। वह चेहरा कोई और नहीं महारानी कैकेयी की दासी मंथरा का था। मंथरा को श्री राम जी का राजा बनना अच्छा नहीं लग रहा था वो भरत जी को राजा बनते हुवे देखना चाहती थी। वह दुखी होकर महारानी कैकेयी के पास गयी। 

महारानी कैकेयी श्री राम के राज्याभिषेक के निर्णय से बहुत खुश थी और उत्सव की तैयारियों का जायजा ले रही थी। मंथरा का लटका हुआ चेहरा देखकर पहले तो उन्हें गुस्सा आया लेकिन मंथरा ने बड़ी चालाकी से काम लिया। उसने कहा मै अपने लिए थोड़े दुखी हूँ मैं तो आपके पुत्र राजकुमार भरत की चिंता में दुखी हूँ। भरत का नाम सुनते रानी ने कहा कैसी चिंता क्या बोल रही स्पष्ट बोलो। Ramayan Story With Pictures


माता कैकेयी के दो वचन - Ramayan Story in Hindi

मंथरा ने महारानी कैकेयी को अकेले में ले जाकर खूब उलटी-सीधी बाते सिखाई उसने बड़ी चालाकी से कैकेयी के हृदय में पुत्र मोह को जागृत कर दिया तथा विवाह से पहले राजा दशरथ द्वारा कोई भी दो माँग मानने के वचन को याद दिलाते हुवे भरत को राजा बनाने की माँग करने के लिए मना लिया।

राजा दशरथ और महारानी कैकेयी के विवाह से पूर्व एक युद्ध के दौरान कैकेयी ने राजा दशरथ के प्राण की रक्षा की थी। राजकुमारी कैकयी सुन्दर थी राजा दशरथ ने उनसे विवाह का निवेदन किया रानी कैकेयी ने दो वचन माँगे राजा दशरथ तैयार हो गए और दोनों का विवाह हो गया।  Ramayan Story With Pictures

मंथरा की बातों में आकर रानी ने अपना चेहरा दुखी बना लिया अपने बाल खोल दिए और रोते हुवे कोप भवन में सो गयीं। राजा दशरथ तक यह बात पहुँची राज तुरंत रानी के महल में पहुँचे  ऐसी हालत देख कर उन्हें बड़ा दुःख हुआ। वो कैकेयी से बहुत प्रेम करते थे।

उन्होंने पूछा- 'हे केकयी! तुम क्यों दुखी हो सबकोई देखो कितना प्रसन्न है आखिर किस चीज  गई तुमको मुझे बताओ साड़ी दुनिया से खोज के मैं ला दूँगा तुम दुःख मत करो मुझे बताओ आपको क्या चहिए ?' 

रानी कैकेयी ने विवाह से पूर्व राजा द्वारा दिए दो वचनों की याद दिलाई और उन्होंने पहले माँग के रूप में श्रीराम को 12 वर्ष का वनवास तो दूसरे माँग में भरत को राजा बनाने की माँग रखी। रानी कैकयी की माँग सुन कर राजा दशरथ का ह्रदय बैठ गया वे दुःख से व्याकुल होने लगे किसी तरह अपने आप को सँभालते हुवे उन्होंने कैकेयी से कहा - हे कैकयी तुम इतनी निर्दयी कैसे हो सकती हो ?

सरयू नदी पार करते हुवे
सरयू नदी पार करते हुवे 

श्री राम माता सीता और लक्ष्मण जी का वनवास 

मेरे प्रिये पुत्र को जंगल में जाने की माँग मत करो इसके बदले में तुम जो माँगो मै देने को तैयार हूँ। राम को देखे बिना मैं एक पल भी जीवित नहीं रह सकता उसका समय अब राज करने का हुआ हैं जंगल की भयंकर यातनाएँ क्यों दे रही हो " राजा दशरथ ने कैकयी को बहुत मनाने का प्रयास किया लेकिन कैकेयी अपने माँग पर अडिग रही।

'रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाए' भगवान् कुल के मर्यादा का कभी भी उलंघन नहीं करते थे उन्हें अपने पिताजी का दिया हुआ वचन के बारे में पता चला। साथ ही माता कैकेयी के दो माँगों की भी सुचना मिली। उन्होंने शीघ्र ही निश्चय किया की उनकी वजह से उनके पाटजी का दिया हुआ वचन नहीं टूट सकता और उन्होंने वन में जाने का निर्णय ले लिया।

 श्री राम माता कैकयी के पास उनके महल में गए और हाथ जोड़कर उनसे विनती की - हे माता! आप तनिक भी दुःख ना करे मैं शीघ्र ही वनवास के लिए प्रस्थान करूँगा। मेरा छोटा भाई भरत राजा बने तो मुझे भी बहुत ख़ुशी मिलेगी आप अपना दुःख त्याग दीजिए।' इतना कहकर श्रीरामचन्द्र माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ 12 वर्ष के लिए वनवास पर चल दिए। Ramayan Story With Pictures

Ramayan Hindi- राजा दशरथ की मृत्यु 

राजा दशरथ राम के वियोग में बिलख-बिलख कर रो रहे थे। उनका हृदय बहुत दुखी हो गया। राजा दशरथ -साथ पूरी अयोध्या नगरी में शोक छा गया। अपने प्रिये राजकुमार और उनकी पत्नी को वनवास जाने की बात सुन कर जनता भी रोने लगे पुरे अयोध्या में मानो विपत्ति टूट पड़ी हो चिड़ियों ने चहचहाना तो फूलो ने खिलना छोड़ दिया। 

अयोध्या जनता भी वनवास  प्रिये राजकुमार के पीछे-पीछे जाने लगी। श्रीराम ने उन्हें बहुत समझाया लेकिन कोई नहीं माना फिर राम ने सबको अकेला सोता छोड़ कर लक्ष्मण और सीता के साथ सरयू नदी को पार किया। जब  वैन में गए तब भरत जी अयोध्या में नहीं थे वे अपने नाना के घर गए थे। 

इधर दशरथ महाराज की हालत ख़राब होती जा रही थी पुत्र मोह में रोते-रोते उनके प्राण पखेरूँ उड़ गए। जब राजा दशरथ की मृत्यु हुई तब उनके कोई भी पुत्र उनके पास नहीं थे। कालांतर में राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता द्वारा दिया गया श्राप फलीभूत हुआ और राजा दशरथ भी उन्ही की तरह पुत्र के वियोग में रोते-रोते स्वर्ग को प्रस्थान कर गए। 

Ramayan Hindi : राम और भरत मिलन
Ramayan Hindi: राम और भरत मिलन 

राम और भारत मिलन 

Ramayan Story In Hindi रामचंद्र जी के जाने के बाद भरत जी को उनके नानाजी के घर से बुलाया गया। तबतक राजा दशरथ  शरीर वैज्ञानिक विधि से किसी तेल में सुरक्षित रखा गया था। भरत जी अयोध्या वापस आ गए। उन्हें जब सारी कहानी का पता चला  दुखी हुवे उन्होंने अपनी माता कैकयी को बहुत बुरा-भला भी कहा। राजा दशरथ जी के मृत्यु के बाद रानी को भी अपने माँग पर बहुत पश्चाताप हुआ। Ramayan Hindi

भरत जी ने शीघ्र ही अपने पिता दशरथ का उचित दाह-संस्कार किया। इसके बाद भरत जी रामचंद्र जी को वापस लाने के लिए जंगल में गए। भरत जी जंगल में अपने साथ अयोध्या की सेना लेकर भी गए थे जिससे की लक्षमण जी के मन में संदेह उत्पन्न हो गया की वह भैया श्री के साथ युद्ध करने आ रहे हैं जिससे की वो श्री राम का वध कर हमेशा के लिए अयोध्या का राज्य ले सके और आजीवन राजा बने रह सके।

लक्ष्मण जी अपना धनुष और तीर कमान उठाकर भारत से युद्ध करने की तैयारी करने लगे और श्री राम को भी तैयारी करने को कहने लगे। लक्ष्मण जी बहुत क्रोधित हो गए थे उन्होंने भरत के वध करने की प्रतिज्ञा खाने जा रहे थे तभी आकशवाणी हुई और उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा रोक ली भगवान् श्री राम ने लक्ष्मण जी को समझाया और कहा की भरत ऐसा नहीं हैं मैं अभी एक इशारा करू तो वो तुम्हे सारा राज्य दे सकता हैं।

श्री राम सही थे भरत युद्ध करने नहीं उनलोगो को वापस बुलाने आये थे लेकिन श्री राम ने वापस जाने से इंकार कर दिया। भरत जी के बहुत निवेदन करने पर भी राम जी नहीं माने।  अंत में भरत उनकी चरण पादुकाएँ लेकर वापस अयोध्या आ गए और इन पादुकाओं को सिंहासन पर विराजित कर राज्य चलाने लगे। Ramayan Hindi

Ramayan Story In Hindi - शूर्पणखा की नाक 

जंगलो-जंगलो घूमते-घूमते कुछ समय बाद श्री राम, लक्ष्मण और सीता के साथ दण्डकारण्य नामक वन में पहुँचे। वहाँ महाबलशाली रावण  शूर्पणखा श्रीराम के रूप देखकर मोहित हो गई। वह श्री राम के साथ विवाह करना चाहती थी। उसने श्री राम के सामने अपने विवाह का प्रस्ताव रखा।  श्री राम ने कहा - 'मैं तो शादीशुदा हूँ वो देखो मेरा छोटा भाई लक्ष्मण हैं वो भी बहुत सुन्दर हैं तुम उसके पास क्यों नहीं जाती। Ramayan Story In Hindi 

श्री राम ने उसे ऐसा कहकर लक्ष्मण जी के पास भेज दिया। वह लक्ष्मण जी के पास गयी। उन्हें राक्षसी  बड़ा गुस्सा आ गया शादी करना तो दूर लक्ष्मण जी ने उसका नाक काट दिया। उसका शक्ल बहुत ही भद्दा हो गया। उसकी पूरी नाक कट चुकी थी  शूरत लिए अपने भाई के पास गई और सारा कहानी सूना दिया।

सीता के सुंदरता के बारे में बताते हुवे शूर्पणखा ने रावण के ह्रदय में मोह जागृत कर दिया। रावण सुन्दर स्त्री को बलपूर्वक प्राप्त करने के लिए तैयारी करने लगा। उसने राम और लक्ष्मण  ठिकानो का पता किया। तथा अपने मित्र मारीच के पास गया। उसे जानवर का रूप बनाने की कला आती थी। उसने अपने आप  के हिरण के रूप में परिवर्तित कर लिया। तथा श्री राम के आश्रम के आस-पास घूमने लगा। Ramayan Story In Hindi 

Ramayan Story In Hindi सीता जी ने सोने की हिरन को देखकर उस पर मोहित हो गयी तथा श्रीराम से उस स्वर्ण हिरण को पकड़ के लाने का आग्रह करने लगी। राम जी माता सीता मना नहीं कर पाए तथा लक्ष्मण को सीता  सुरक्षा हेतु छोड़कर अकेले हिरण के पीछे धनुष-बाण लेकर उसकी खोज में निकल गए। 

Ramayan Story In Hindi - शूर्पणखा की नाक
                             Ramayan Story In Hindi - शूर्पणखा की नाक 


माता सीता का दुष्ट रावण द्वारा हरण

लक्ष्मण जी सीता जी के पास उनकी सुरक्षा के लिए रुक गए। क्युकी वे माता सीता  नहीं छोड़ना चाहते थे। कुछ देर बार वह मायावी हिरन रूपी राक्षस रामचंद्र जी को बहुत दूर बिच जंगल में ले गया। उसने देखा की लक्ष्मण तो वही पर रुक गए हैं तभी श्री राम ने तीर चला दिया तीर उस मायावी राक्षस  लगा और  रामचंद्र जी आवाज में लक्ष्मण लक्ष्मण चिल्लाने लगा। Ramayan Hindi, Ramayan Story In Hindi

राक्षस की आवाज को रामचंद्र की आवाज समझकर माता सीता घबरा गई। लगा रामजी किसी मुसीबत में फंस गए हैं इसीलिए उन्होंने लक्ष्मण जी को मदद करने भेजा। लक्ष्मण जी जानते थे राम जी महाबलशाली हैं  उन्हें चिंता करने की कोई जरुरत नहीं हैं। लेकिन माता सीता नहीं मानी उन्होंने जबरजस्ती लक्ष्मण जी को राम के पीछे जाने को कहा। 

Ramayan Story In Hindi
फिर लक्ष्मण जी ने माता सीता और उनके कुटिया के चारो तरफ एक लक्ष्मण रेखा खींची और माता सीता से उस रेखा से बाहर नहीं जाने का निवेदन कर वो आवाज  अपना धनुष-बाण उठा कर चल दिए। रावण इसी पल के इन्तजार में बैठा था। उसने एक झूठे साधू का भेष बनाया और माता सीता के पास भिक्षा माँगने के नाम पर उनका अपहरण कर लिया।  

कुछ समय पश्चात जब दोनों भाई वापस कुटिया में आये तो माता सीता वहा  दोनों भाई दुःख से व्याकुल हो गए। कुटिया के आस-पास सिते सीते  लगाकर माता सीता की खोज करने लगे। लेकिन उन्हें माता सीता कही नहीं नहीं दिखी।  वे माता सीता की खोज में निकल पड़े। Ramayan Hindi

जटायु, सुग्रीव और हनुमान मिलन और बाली वध 

सीता की खोज करते-करते रास्ते में उन्हें जटायु नामक पक्षी मिला जिसके पंख काट चुके थे तथा वो अपनी अंतिम साँस गिन रहा था। राम और लक्ष्मण दौड़ के उसके पास गए उसके बहते खून को रोकने का प्रयास करने लगे उन्होंने उसका हाल किसने और क्यों किया इस बारे में पूछा। जटायु ने रावण का सारा हाल कह सुनाया। और बताया की स्त्री की रक्षा करते हुवे रावण ने मेरे पँख काट दिए। Complete Ramayan Story In Hindi.

सारी कहानी कहने के बाद जटायु की वही मृत्यु हो गई राम और लक्ष्मण ने मिल कर उसका अंतिम-संस्कार किया। तथा वो दोनों सीता की खोज में आगे निकल गए। चलते-चलते रामचन्द्रजी ऋष्यमूक पर्वत पास पहुंचे। वहाँ उन्हें सुग्रीव जी से मुलाकात हुई सुग्रीव जी का राज्य उनके भाई बाली ने हड़प लिया था साथ ही उनको भी गुलाम बना लिया था।  

Ramayan माता सीता का दुष्ट रावण द्वारा हरण
Ramayan माता सीता का दुष्ट रावण द्वारा हरण


बाली बहुत ज्यादा बलशाली था आजतक उसे युद्ध में किसी ने परास्त नहीं किया था। श्रीराम ने बड़ी चालाकी के साथ बाली का वध किया और सुग्रीव को उनकी पत्नी साथ उनका राज्य वापस दिलाया। हनुमान जी से भी इसी पर्वत पर श्री राम और लक्ष्मण जी का मुलाकात हुआ। हनुमान जी श्री राम के सबसे बड़े भक्त हैं। सुग्रीव जी, जामवंत जी और हनुमान जी ने माता सीता की खोज करने में श्री राम की हर मुमकिन सेवा करने का वचन दिया।

सुग्रीव जी ने पृथ्वी के कोने-कोने में दसो दिशा में माता सीता की खोज करने के लिए दूतों को भेजा। सभी दूत सभी दिशाओं की तरफ चल पड़े। कुछ समय पश्चात सभी निराश होकर वापस लौट आये।

हनुमान जी बहुत ही बहादुर और बलशाली हैं। उन्होंने सीताजी को खोज निकाला। वे खोज करते-करते लंका में सीता जी के पास अशोक वाटिका में जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने बहुत से पेड़ तोड़ डाले और फल खा लिये। यह देखकर राक्षस उन्हें रावण के पास ले गए। 

लंका दहन  और रावण वध- Ramayan Story In Hindi 

 रावण ने हनुमान जी को साधारण वानर समझ उन्हें सबक  लिए उनके पूँछ में आग लगवा दी। पूंछ में लगी आग से  हनुमान जी पूरी लंका को जलाने लगे। रावण  पूरा महल आग की लपटों से भर गया  साथ ही पूरी राजधानी धु-धु कर जल उठी। लंका जलाने के बाद हनुमान जी लौटकर सीताजी का पता श्री रामचन्द्रजी को बता दिया।Ramayan Story In Hindi 

सुचना पाकर श्री रामचन्द्रजी ने रावण पर चढ़ाई शुरू कर दी। समुद्र पर पुल बांधा गया। रावण के अत्याचार को देखकर उसका भाई विभीषण जी भी श्रीराम की तरफ आकर मिल गए। कई रोज तक बड़ा भयंकर युद्ध हुआ। श्रीराम की वानर सेना, सुग्रीव जी, जामवंत जी और हनुमान जी बड़ी बहादुरी से युद्ध लड़ा और अनेक राक्षसों का वध किया। Complete Ramayan Story In Hindi.

अंत में कुवार के महीने में दशहरे के दिन श्रीरामचन्द्रजी ने रावण का वध किया। सीताजी वापस आ गई। श्रीराम सीता मिलकर बहुत खुश हुवे उनके साथ-साथ पूरी वानर सेना ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। अब चौदह वर्ष समाप्त होने वाले थे। राम चंद्र जी ने लंका का राज्य विभीषण को देकर इसके बाद पुष्पक-विमान पर बैठकर वे अयोध्या लौट आये। उनके साथ हनुमान जी, सुग्रीव जी आदि भी आये थे। आज भी इस दिन को दिवाली त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं।

रामायण कथा हिंदी लव-कुश महर्षि वाल्मीकि
रामायण कथा हिंदी- लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि  
अब पूरी धूम-धाम के साथ भगवान् श्री राम का राजयभिषेक हुआ। एक बार पुनः  से लेकर पुरे भारत वर्ष में श्रीराम के राजयभिषेक की तैयारी पुरे जोरशोर से चलने लगी। सभी लोग शीघ्र ही अपने चाहते राजकुमार को राजा बनते हुवे देखना चाहते थे। 

Ramayan Story In Hindi -अयोध्या वापसी 

अपने अधूरे सपने को पूरा करना चाहते थे। आखिर वो शुभ घड़ी आ ही गयी और श्री राम का ऐतिहासिक राजयभिषेक हुआ भगवान् श्री राम मात सीता के साथ राजसिंहासन पर बैठ गए और बड़ी कुशलता से अपने धर्म का निर्वाहन और प्रजा की सेवा करने लगे।  

भगवान् के राज्य में मनुष्य तो मनुष्य हैं सभी जिव प्राणी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी हर्षोउल्लासित थे सब सुखपूर्वक जीवन यापन करते थे। राम चरित मानस में तुलसी दास महाराज जी राम राज्य का वर्णन करते हुवे कहते हैं की राम के राज्य में सूरज उतना ही ताप देता था जितना शरीर आसानी से सहन कर सके। 

बारिस उतनी ही होती थी जितना की फसल और पशु सहन कर सके। पेड़ फलो से लदे रहते थे किसिम किसिम के फूल तरह-तरह के सुगंध फैला रहे हैं। ऐसा मानो स्वर्ग पृथ्वी पर उतर आया हैं। 

एक दिन भगवान् श्री राम अपने प्रजा का हालचाल नजदीक से जानने समझने के लिए जनता के बिच जाने का निर्णय लिया। कोई पहचान ना ले इसीलिए उन्होंने अपना वेश बदल लिया। भगवान् श्री राम नगर में घूमते-घूमते एक पेड़ के निचे जहाँ पहले से ही कुछ लोग थे उनके पास रुक गए। 

वहा एक धोबी के बातो ने भगवान् श्री राम को बहुत दुखी किया और उन्हें पुनः एक कठोर निर्णय लेने पर विवश कर दिया। उस धोबी ने माता सीता पर प्रश्न किया जिससे श्री राम की दुःख हुआ। वे वापस महल आये तथा अपनी प्रजा के संतुष्टि के लिए माता सीता को वाल्मीकि जी के आश्रम में भेजने का कठोर निर्णय लिया। 

मात सीताजी को लोक लज्जा के कारण वाल्मीकि आश्रम में रहना पड़ा। यही आश्रम में माता सीता ने दो तेजस्वी पुत्रो को जन्म दिया जिनका नाम लव और कुश था।  वे दोनों वाल्मीकि महर्षि के शिष्य थे तथा वेद ज्ञान और युद्ध में प्रवीण और बहादुर बने।

श्रीराम द्वारा देह त्याग Ramayan Story In Hindi

रामचन्द्रजी ने अश्वमेघ यज्ञ किया। इस समय सीताजी को वापस बुलाया गया और पुनः प्रजा की मांग पर अग्निपरीक्षा दे ने के लिए कहा गया इस बात से माता सीता फिर बहुत दुखी हुई और अपने पवित्रता की शपथ खाते हुवे माता धरती को फटने का आह्वाहन किया और धरती माता सीता को सबसे पवित्र सिद्ध करते हुवे फटी और माता सीता धरती में हमेशा हमेशा के लिए समा गयी।

भगवान् श्री राम अत्यंत दुखी हुवे वे अब हमेशा के लिए अकेले हो गए कुछ समय पश्चात श्री राम ने भी सरयू में अपना शरीर त्याग दिया और जल समाधी ले ली। लव और कुश बहुत वीर थे बाद में वे राजा बने और राज करने लगे। अथ श्री रामायण सम्पूर्णम।

Ramayan Story In Hindi

श्री राम हमारे प्राणवायु हैं। यह सिर्फ श्री राम का नाम ही था जिसने हजारो सालो की गुलामी में भी हमें अधर्म के खिलाफ लड़ने का ऊर्जा देता रहा। वह राम नाम की ही संजीवनी थी जिसने गुलामी काल में भी हिन्दू संस्कृति को जीवित रखा वह राम ही हैं जो हमें हमेशा एकता के सूत्र में बाँधते हैं।

सभी पुरुषो में सर्वोत्तम, मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम सभी मनुष्यों के लिए सबसे उत्तम आदर्श हैं। आज के समय में भी राम राज्य को ही सबसे अच्छी शासन प्रणाली कहा जाता हैं। कोई भी राजा या मंत्री अपने राज्य को राम राज्य समतुल्य बताकर ही अच्छा महसूस करता हैं। राम राज्य किसी भी सरकार का लक्ष्य होता हैं। आज तक राम जैसा राजा कोई नहीं हुआ।Ramayan Story In Hindi.

श्री राम जन्म के कुछ वर्ष पश्चात् ही शिक्षा ग्रहण करने हेतु राज-महल के सुख-आराम छोड़ जंगल में कड़ी तपस्या के लिए चले जाना, वहाँ भयंकर राक्षसों से लगातार युद्ध में रत रहना इसी बीच विवाह हो जाना।

उसके तुरंत बाद राज सिंहासन की जगह नई-नई अपने ससुराल आई माता सीता और भाई लक्षमण के साथ 12 वर्ष का वनवास अभी वनवास की कठिनाई ख़त्म हुई नहीं थी की धर्म पत्नी का सबसे शक्तिशाली राक्षस द्वारा अपहरण कर लेना।

कई महीनो तक भूखे प्यासे पहाड़, जंगल, नदी, समुद्र पार करते हुवे माता-सीता की खोज करना फिर इतनी कठिनाई में भी समुद्र पर पुल बांधना घर से सिर्फ भाई और पत्नी के साथ निकले थे और अंत में कोटि सेना लेकर रावण के साथ भयंकर युद्ध करके उसके सारे राक्षस जाती का अंत करना।

सभी पुरुषो में सर्वोत्तम, मर्यादापुरुषोत्तम

भगवान् लक्षमण और माता-सीता के साथ वापस अयोध्या आते ही लोक लज्जा के कारण धर्म-पत्नी से अलग होना। पुत्र के सुख से वंचित होना और जब पुत्र मिला तो पत्नी से हमेशा-हमेशा के लिए दूर हो जाना।

पुरे जीवन काल में एक बार भी ऐसा कोई मौका श्री राम को नहीं मिला की वो अपने बच्चो,पत्नी, माता-पिता अपने परिवार के साख सुखपूर्वक राज कर सके। श्री राम के व्यक्तिगत जीवन हमेशा अपूर्ण रहा लेकिन फिर भी उनके राज में प्रजा सुख के सबसे अच्छे आयाम पर रही।

राम किसी भी कठिन समय में अपने कर्त्वय से दूर नहीं गए। भले ही परेशानियाँ थी लेकिन फिर भी उन्होंने हमेशा प्रजाहित में ही कार्य किया उनके समय में प्रजा को कोई दुःख नहीं था। मानव के कसौटी पर देखा जाए तो राम बहुत दुखी थे लेकिन उनकी महानता यह हैं की एक चींटी भी श्री राम के वजह से जीवन में कभी भी दुखी नहीं हुई।

श्री राम के पुरे जीवन पर एक दृष्टि डाला जाए तो हमें पता चलता हैं की उनका जीवन कितना सिंघर्षपूर्ण रहा हैं। चक्रवर्ती सम्राट के पुत्र होने के बावजूद बचपन से ही कभी उनको कोई सुख नहीं मिला। हमारे नजर से जो सुख होने चाहिए श्री राम हमेशा उनसे वंचित रहे फिर भी तनिक मात्र भी दुःख, असंतोष, व्याकुलता, मोह, लोभ, क्रोध या अधर्य के भाव उनमे नहीं दिखा। लाख मुसीबते उनके जीवन पर टूटी फिर भी श्री राम शांत चित आनंद भाव से ही धर्मानुसार जीवन के निर्णय लेते रहे।

और मुझे लगता हैं हमारे सभी सुखो का सार इसी में छिपा हैं। मानव मात्र के लिए यह एक ब्रह्म ज्ञान हैं जो हमें श्री राम के जीवन से सिखने को मिलता हैं। छोटी से छोटी परेशानियों में भी घबराकर या क्रोध करके हम अपना बहुत बड़ा अहित स्वयं कर लेते हैं यदि श्री राम की तरह परेशानियों से भी लड़ने की प्रेरणा लिया जाये तो फिर कोई समस्या ना रहेगी।


श्री रामायण भगवान् ! Ramayan Story With Pictures

इतने कष्ट और संघर्षपूर्ण जीवन होने के बाद भी श्री राम ने जो आदर्श स्थापित कर दिए हैं वो हमसे प्रत्येक मनुष्य का लक्ष्य बन चूका हैं। आज तक राम जैसा आदर्श पुत्र, राम जैसा आदर्श भाई, राम जैसा आदर्श पति, राम जैसा आदर्श बंधू, राम जैसा आदर्श राजा और राम जैसा आदर्श मनुष्य जन्म नहीं लिया।



और यही सब कारण हैं की राम भगवान् हैं।  राम ईश्वर ही हैं जिन्होंने मनुष्य योनि में जन्म लेकर मनुष्यो को जीवन जीने का सर्वोत्तम मार्ग धर्म का मार्ग दिखाया। उस मार्ग पर स्वयं चलते हुवे काम,क्रोध,मोह, तृष्णा और दुःख से दूर रहते हुवे उन्होंने एक आदर्श स्थापित किया। विषम परिश्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए ऐसी सिख हमें श्री राम ने ही दी।

Complete Ramayan Story In Hindi  रामचन्द्रजी बड़े आदर्श पुरुष थे। उनकी पूजा अवतार के रूप में की जाती हैं। इनका जीवन चरित्र सबसे पहले वाल्मीकि ऋषि ने संस्कृत भाषा में लिखा उसके बाद कलयुग में तुलसीदास जी ने अवधी में रामचरितमानस लिखा और और बहुत ही सुन्दर ढंग से श्रीराम के जीवन को बताया हैं।  Ramayan Story With Pictures

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