विश्व के 5 सबसे प्रसिद्ध तानाशाह।

क्रूरता और निर्दयिता की जब भी बात होती हैं तो लोगो के जेहन में सबसे पहला नाम एडोल्फ हिटलर का आता हैं जबकि हिटलर अकेला ही निर्दयिता के पराकाष्ठा को पार नहीं किया था। हिटलर के अलावा भी बहुत ऐसे तानाशाह हुवे थे जिन्होंने हिटलर से ज्यादा क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थी। इनमे से बहुत इतिहास में दर्ज ही नहीं हुवे कुछ हुवे भी तो षड़यंत्र के तहत उनमे से भी कई को भुला दिया गया। इतिहास वही लिखता हैं जो विजयी होता हैं जो युद्ध में जिन्दा रहता हैं युद्ध की कहानी सुनाता हैं और सब उस पर आँख बंद कर के विश्वास भी कर लेता हैं पिछले सैकड़ो सालो के इतिहास लेखन का भी यही तरीका हैं जो जिन्दा बचा वो कभी अपने दुश्मन को दयालु ईमानदार नहीं बताएगा और यही कारण था की हिटलर इतिहास में सबसे क्रूर तानाशाह हो गया और युद्ध जितने वाले दयालु और शांतिप्रिए हो गए। आइये हिटलर के अलावा टॉप 5 क्रूर तानाशाह के बारे में जानते हैं। 

1 - जोसफ स्टालिन :-  सोवियत तानाशाह जोसफ स्टालिन का जन्म जॉर्जिया के गोरा स्थान में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। बचपन से ही स्टालिन का मन स्कूल से ज्यादा अपने दोस्तों के साथ घूमने और लड़ाई
करने में लगता था। युवा अवस्था में क्रन्तिकारी साहित्य ने स्टालिन को राजनीति में जाने की प्रेरणा दी। 1922 से लेकर 1953 तक सोवियत यूनियन के तानाशाह का कार्य किया सोवियत तानाशाह के कारण कितने लोगो की मृत्यु की हुई इसपर बुद्धिजीवी का विभिन्न मत हैं किसी का कहना 70 लाख तो किसी का मत करोडो से  सँख्या जो भी था इस एक व्यक्ति के कारण करोडो लोगो को अपने परणो से हाथ धोना पड़ा था। सोवियत तानाशाह बनते ही स्टालिन ने रूस में सामूहिक कृषि , भारी उद्द्योगो की स्थापना और नए श्रमिक समाज का निर्माण करने पर जोर दिया। अपनी इन महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति लिए स्टालिन ने निर्दयता और क्रूरता की सारी हदे पार कर दी थी अपने खिलाफ उठ रहे सभी आवाज को बंदिक की गोली के दम पर हमेशा हमेशा के लिए खामोश कर दिया। स्टालिन सिर्फ राष्ट्रीय तानाशाह ही नहीं था वह साम्यवादी नेता भी था।  1936 में 13 रूसी नेताओ पर स्टालिन को मारने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया जिन्हे स्टालिन ने अविलम्ब फांसी पर लटका दिया। 1937 तक मजदुर संघ , सोवियत और सरकार के सभी विभाग पूर्णतया स्टालिन के अधीन हो गए थे जिसका उपयोग स्टालिन अपने विरोधियों के कत्लेआम में उपयोग किया। द्वितीय विश्व युद्ध में पहले जर्मनी के साथ बाद में ब्रिटेन के साथ संधि इस बात की पुष्टि करती हैं स्टालिन एक शातिर तानाशाह था।


2 - माओ ते सुंग :-  माओ ते सुंग या माओ जुडांग एक चीनी तानाशाह और चीनी क्रन्तिकारी के रूप में प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में कई लोग माओ को एक विवादस्पद व्यक्ति के रूप में देखते हैं लेकिन इसके विपरीत चीन के लोग माओ की बहुत इज़्ज़त करते और उन्हें एक महान क्रन्तिकारी, राजनैतिक रणनीतिकार, सैनिक पुरोधा और देशरक्षक के रूप में देखते हैं। चीनी क्रांति को सफल बनाने
का श्रेय भी माओ ते सुंग के पास हैं। माओ ने जनवादी गणतंत्र चीन की स्थापना सन 1949 में की और 1949 से लेकर 1976 तक चीन का नेतृत्व किया। मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा को सैनिक रणनीति में जोड़कर उन्होंने जिस सिद्धांत को जन्म दिया उसे आज माओवाद के नाम से जाना जाता हैं। चीनियों के अनुसार माओ ने अपनी निति और कार्यक्रमों के माध्यम से आर्थिक, तकनिकी एवं सांस्कृतिक विकास के साथ विश्व में प्रमुख शक्ति के रूप में ला खड़े करने में मुख्या भूमिका निभाई। वे कवी, दार्शनिक, दूरदर्शी, महँ प्रशासक के रूप में गिने जाते हैं। इसके विपरीत माओ के चीन का नेतृत्व के दौरान पुरे विश्व में करोड़ लोगो से ज्यादा मरने की बाटन कही जाती हैं। माओ के ग्रेट लिप फॉरवर्ड और सांस्कृतिक क्रांति नमक सामाजिक था राजनैतिक कार्यक्रमों के कारन चीनी अर्थव्यवस्था था संस्कृति का अकाल जैसे स्थिति उपन्न होने की बात भी कही जाती हैं जिसके कर्णम 1949 से लेकर 1975 तक करोडो लोगो की मृत्यु होने की बात कही जाती हैं। माओ संसार के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से गिने जाते हैं। टाइम पत्रिका के अनुसार 20 वी सदी के १०० सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में माओ आते हैं।  



3- बेनितो मुसोलिनी :-  बेनितो मुसोलिनी का जन्म 29 जुलाई 1882 को इटली के प्रिदायपो शहर में हुआ था। अठारह वर्ष की उम्र में मुसोलिनी विद्यालय का अध्यापक बन गया था। 19 साल के उम्र में वे स्विट्ज़रलैंड भाग गए थे जहा वो दिन में मजदूरी करते और रात को समाजवादियों से मिलते जुलते और समाजवाद का अध्यन
करते। कुछ समय के लिए सेना के लिए कार्य किया बाद में संपादक का कार्य भी किया बाद में अपने विचारो के कारन वह से निकल दिया गया था। फिर भी समाजवादी आंदोलन में भाग लेते रहे। बेनितो मुसोलिनी अब तक इटली के एक प्रभावशाली राजनेता बन गए थे जिन्होंने फासिस्ट पार्टी का नेतृत्त्व किया। मुसोलिनी फासीवाद के दर्शन की नीव रखने वालों में से प्रमुख व्यक्ति था। ऐसा कहा जाता हैं की हिटलर के साथ मिलकर1935 में अबीसीनिया पर हमला किया और द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई। जब द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ा तो पुरे यूरोप में मुसोलिनी और हिटलर एक तरफ थे तो दूसरे तरफ ब्रिटेन और फ्राँस थे। क्रमशः और इनमे और शक्तियाँ आती गई। पहले हिटलर की विजय हुई बाद में फासिस्टों की पराजय हुई। लाखो हत्या का कारण रहे मुसोलिनी की हत्या गोली मार कर की गई थी। इनके अंतिम यात्रा में इनके परिवार का कोई सदस्य समिल्लित नहीं हुआ था ऐसा कहा जाता हैं। बेनितो मुसोलिनी दूसरे विश्व युद्ध में एक्सिस समूह में मिलकर युद्ध किया। वे हिटलर के निकटम राजनीतिज्ञ थे। इनका जीवन अवसरवाद, आवारापन और प्रतिभा के मिश्रण जैसा था।  पराजयों कारण ऐसा हो गया की 25 जुलाई 1943   इटली के प्रधानमंत्री के पद से स्थिपा देना पड़ा और वे हिरासत में लिए गए  बाद  हिटलर द्वारा छुड़ाया गया और इटली के एक राज्य के कठपुतली प्रधान का पद दिया गया। 26 अप्रैल 1945 को मित्र सेना इटली पहुंच गई और २८ अप्रैल को स्विट्ज़रलैंड भागते हुवे मुसोलिनी को मित्र सेना द्वारा पकड़ लिया गया और गोली मार दी गई।  


4- पोल पॉट :-  सलोथ सार जिन्हे अधिकतर लोग पोल पॉट के नाम से जानते हैं , जो खमेर रोज नमक कम्बोडियाई साम्यवादी आंदोलन के नेता थे। पोल पॉट 1976-1979 के मध्य लोकतान्त्रिक कम्पूचिया के
प्रधानमंत्री थे। कम्बोडिया के नेता के रूप में अपने देश को शुद्ध करने के परिणामस्वरूप अनुमानतः २० से २५ लाख लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। पोल पॉट 1975 के मध्य में कम्बोडिया के नेता बने।  अपने सत्ताकाल के दौरान, पोल पॉट ने एक शून्य वर्ष में सभ्यत्ता के पुनरुत्थान के उद्देध्य से कृषि समूहीकरण का एक संस्करण लागु किया, जिसके अंतर्गत शहरी निवासियों कोग्रमिण इलाको में स्थानांतरित कर उन्हें सामूहिक खेतो और बेगार परियोजनाओ में काम करने के लिए बाध्य किया गया।  इस दस श्रम, कुपोषण, ख़राब चिकित्सा सेवाओं के सयुक्त प्रभाव और मृत्युदंड के चलते कम्बोडिया की लगभग २१% जनसँख्या काल का ग्रास बन गयी। 1979 में कम्बोडिया-वियतनाम युद्ध के दौरान जब पडोसी वियतनाम ने कम्बोडिया पर आक्रमण किया तो पोल पॉट दक्षिण पश्चिम कम्बोडिया के जंगलो में भाग गए और खमेर रोज सरकार का पतन हो गया। 1979 से 1997 के दौरान पोल पॉट अपने पुराने खमेर रोज के बचे हुवे सहयोगियों के साथ अपनी गतिविधियों को कम्बोडिया और थाईलैंड के सीमा क्षेत्र से संचालित करते रहे और जहाँ, वे पुनः सत्तासीन हो गए साथ ही सयुक्त राष्ट्र ने उनकी सरकार को कम्बोडिया की सच्ची सरकार के रूप में मान्यता प्रदान की।


5-फिदेल कास्त्रो :- फिदेल अलेजांद्रो कास्त्रो रुज का जन्म 13 अगस्त 1926 को क्यूबा के बीरान नामक जगह पर हुआ था। फिदेल कास्त्रो एक क्यूबन साम्यवादी क्रांतिकारी तथा राजनीतिज्ञ थे। जिन्होंने 1959 से 1976 तक
रिपब्लिक ऑफ़ क्यूबा पर प्रधानमत्री के रूप में राज किया। उसके बाद 1976 से २००८ तक रिपब्लिक ऑफ़ क्यूबा के राष्ट्रपति के पद पर कार्य किया। अमेरिकी विचारधारा के पुरजोर विरोधी कास्त्रो को CIA द्वारा 638 बार कभी विष्फोटक सिगार द्वारा कभी विषैले फफूंद वाले स्विम सूट द्वारा हत्या करने का प्रयास किया गया। इन प्रयासों पर एक प्रसिद्ध किताब "638 वेज़ टो किल कास्त्रो" भी लिखी गई हैं। 1959 में कास्त्रो की गर्लफ्रेंड ने CIA की बात पर सहमत हो कर कास्त्रो को मारने के लिए उस रूम में जहर की गोलियाँ कोल्ड ड्रिंक में मिला दी थी।  जब इस बात का पता कास्त्रो को चला तो कास्त्रो ने अपनी गर्लफ्रेंड  बन्दुक दे दी और उसे मारने को कहा लेकिन उसकी गर्लफ्रेंड उसको गोली मारने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। कई बार हत्या के प्रयासों से बच चूका कास्त्रो ने एक बार यह कहा था की "हत्या के प्रयास से बचने पर अगर एक खेल ओलम्पिक में आयोजित होता तो मै उसमे स्वर्ण पदक जीतता " फिदेल कास्त्रो ने युद्ध लाडे जिनके परिणाम स्वरुप कई हजारो लोगो की हत्या हुई। फिदेल कास्त्रो सबसे लम्बी उम्र तक जीने वाला तानाशाह के रूप में भी जाने जाते हैं। 

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