गांधी नहीं सुभाष बाबू की वजह से अंग्रेजों ने भारत को छोड़ा था।


आज़ादी गाँधी की अहिंसा से नहीं सुभाष चंद्र बोस के हिंसा के डर का परिणाम था : ब्रिटेन प्रधानमंत्री

 बात उस समय की हैं जब पूरा विश्व द्वितीय विश्व युद्ध की आग में जल रहा था विश्व की लगभग आधे से ज्यादा देश परोक्ष या अपरोक्ष रूप से इस युद्ध का हिस्सा थे भारत को इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था लेकिन अग्रेजो के गुलामी के कारण भारत को इस युद्ध में अंग्रेजो की तरफ से लड़ना पड़ा था। विश्व युद्ध में अंग्रेजो को भारी क्षति उठानी पड़ रही थी जिससे भारत जैसे बड़े देश को संभल पाना मुश्किल हो रहा था।  मौके की नजाकत को देखते हुवे हिटलर और जापान की मदद से सुभाष बाबू ने आज़ाद हिन्द फौज द्वारा अंग्रेजो पर हमला कर दिया।तथा "दिल्ली चलो" का नारा दिया।  ये बात सुनते ही गाँधी जी ने आनन्-फानन में मुंबई से आधी रात को अंग्रेजो भारत छोडो नामक अहिंसात्मक आंदोलन छोड़ा तथा "करो या मरो" का नारा दिया।  

आज़ादी गाँधी की अहिंसा से नहीं सुभाष चंद्र बोस के हिंसा के डर का परिणाम था
Clement Attlee 

पुरे देश में अंग्रेजो को भागने के लिए भारत वासी एक दम बेचैन थे लेकिन आमजनता के नेता गाँधी ने अहिंसा का पाठ पढ़ा के सबको मुर्ख बनाया लेकिन गाँधी का अंतिम आंदोलन सरदार वल्लभभाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लालबहादुर शास्त्री जैसे राष्ट्रवादियो द्वारा हाईजैक कर लिया गया तथा "करो या मरो" की जगह बड़ी चतुराई से "करो या मारो" का नारा दिया गया परिणाम स्वरुप पुरे भारत में अंग्रेजो के खिलाफ हिंसात्मक आंदोलन शुरू हो गया।  चारो तरफ से घिरे अंग्रेजो को यह विस्वास हो गया की हम ज्यादा दिन तक भारत को गुलाम नहीं बना सकते जैसे तैसे अपने चमचो चापलूसों के दम पर अंग्रेजो ने अंग्रेजो भारत छोडो आंदोलन तथा सुभाष बाबू को कण्ट्रोल किया लेकिन सुभाष बाबू का आजाद हिन्द फौज का डर अंग्रेजो के जेहन में बैठ चूका था।   

और यही कारण था की अंग्रेजो ने भारत छोड़ने का निर्णय लिया। सुभाष चंद्र बोस दुबारा अंग्रेजो पर हमला करने के लिए दिन रात अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगे हुवे थे जो अंग्रेजो के लिए एक घोर चिंता का विषय बन गया था इसीलिए अंग्रेजो ने प्लान बनाया की सुभाष बाबू के दिल्ली पहुंचने से पहले ही अपने सहयोगियों को भारत का सत्ता देकर बाइज़्ज़त अपने देश इंग्लैंड लौट जायेंगे नहीं तो आज़ाद हिन्द फौज खदेड़ के भगाये गी और जान से भी हाथ धोने का खतरा हैं। 

इसीलिए अंग्रेजो ने सुभाष बाबू को राष्ट्रीय अपराधी घोषित कर उनके गिरफ़्तारी का फरमान निकाल कर सारा पावर गाँधी और नेहरू को दे कर अपना पीठ खुद थपथपाते हुवे भारत में सत्ता हस्तारान्तरण करके चले गए जिसे हम आज़ादी समझने की भूल करते हैं। जिस आजाद भारत में सुभाष चंद्र बोस जैसा भारत माता का सच्चा पुत्र अपराधी हो वह भारत आज़ाद नहीं कहला सकता हैं। इसीलिए मैं कहता हूँ भारत आज़ाद हैं यह सबसे बड़ा मजाक हैं।   

सभी आंदोलनों की तरह गाँधी जी का अंतिम आंदोलन निष्फल हुआ जो थोड़ा बहुत सफलता भी मिली तो वह गांधी के साथ वाले राष्ट्रवादी नेताओ की वजह से मिला जिन्होंने कही न कही इस आंदोलन को हिंसात्मक बनाया जो समय के हिसाब से अत्यंत आवश्यक था। फिर भी अंग्रेजो ने इस आंदोलन को भी कुछ ही महीनो में निर्णय में ले लिए फिर आखिर पाँच साल बाद उस समय गाँधी द्वारा या किसी के भी द्वारा कोई आंदोलन नहीं किया जा रहा था सिर्फ सुभाष बाबू सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगे थे।  गाँधी तो सिर्फ मुस्लिमो की चिंता तथा अपने ब्रह्मचर्य प्रयोग पर ध्यान केंद्रित किये हुवे थे फिर आखिर क्या हुआ की अंग्रेजो को 1947  भारत छोड़ के जाना पड़ा। 

कारण सिर्फ एक था द्वितीय विश्व युद्ध में हुवे भारी क्षति और सुभाष बाबू की सैन्य तयारी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजो को दोबारा युद्ध करने की क्षमता नहीं थी और इधर सुभाष बाबू देश की आज़ादी के लिए युद्ध की युद्ध स्टार पर तयारी कर रहे थे। अंग्रेजो ने सुभाष बाबू के दर से की यदि वो दिल्ली पहुंच गए तो अंग्रेजो को अपने जान से हाथ धोना पड़ेगा और भारत को पूर्ण स्वराज्य भी मिलेगा जिससे की अंग्रेजो को भविष्य में कोई फायदा भी नहीं होगा। 

अतः एक षड्यंत्र के तहत भारत को हमेशा गुलाम बनाने के लिए अंग्रेजो ने ब्रिटेन राज के वफादारी की कसम खाने वाले अपने वफादार सहयोगी गाँधी और नेहरू को भारत का सत्ता ट्रांसफर कर सुभाष बाबू के दिल्ली पहुंचने से पहले ही भाग खड़े हुवे। 

तत्कालीन ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने कहा था की गाँधी ने नहीं बोस ने हमें भारत छोड़ने पर किया था मजबूर 

तत्कालीन ब्रिटेन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली जिन्होंने उस समय भारत को आज़ादी दिया था। 1956  में जब भारत दौरे पर आये तो  कलकत्ता के कार्यवाहक गवर्नर पीबी चक्रवर्ती के मेहमान बने तथा कुछ दिनों के लिए बंगाल में  रुके थे। इस दौरान चक्रवर्ती ने एटली से भारत के आज़ादी के बारे में कुछ सवाल पूछे की क्या कारण था की अंग्रेजो ने भारत छोड़ के जाने का निर्णय लिया। एटली ने जवाब दिया जवाब दिया की भारतीय सैनिको  विद्रोह और आज़ाद हिन्द फौज हिंसा के डर से अंग्रेजो ने भारत छोड़ा। चक्रवर्ती ने एक साक्षात्कार में कहा था की "जब मैंने एटली से पूछा की गाँधी के अहिंसा ने भारत की आज़ादी में कितना योगदान दिया था तो एटली ने लम्बी सांस भरके कहा सबसे कम योगदान गाँधी के अहिंसा का था। "

क्लीमेंट एटली की कही बात एकदम सही हैं उस समय 1946 में स्थिति अंग्रेजो के लिए बदत्तर हो गए थे। भारतीय सैनिक और अंग्रेजी सैनिको के बिच में द्वेष लगा था। साथ ही आज़ाद हिन्द फौज की सैन्य क्षमता में दिन रात बढ़ोत्तरी और सुभाष बाबू के हमले का डर ही अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर विवस किया। 

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गांधी नहीं सुभाष बाबू की वजह से अंग्रेजों ने भारत को छोड़ा था। गांधी नहीं सुभाष बाबू की वजह से अंग्रेजों ने भारत को छोड़ा था। Reviewed by गुरूजी इन हिंदी on October 24, 2019 Rating: 5

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