क्या हवाई जहाज बनाने वाला पहला व्यक्ति भारतीय था ?

यूँ तो समय समय पर मनुष्य ने अपने आवश्यकता अनुसार अपनी जिज्ञासा की पूर्ति हेतु अनेकानेक शोध खोज और अविष्कार या सिद्धिया की हैं लेकिन 18वी और 19वी सदी विज्ञान के क्षेत्र में खोज और अविष्कार के लिए स्वर्णिम युग था। अनेक खोजों और अविष्कारों के  बिच हवाई जहाज की जब भी बात होती हैं तो अमेरिकन राइट ब्रदर का नाम सबसे पहले आता हैं। ऑरविले राइट और विल्बर राइट नामक दो भाइयो को दुनिया का सबसे पहला हवाई जहाँ बनाने और उसे उड़ाने का श्रेय जाता हैं।

राइट ब्रोदर ने 1909 में सफलता पूर्वक यह कारनामा कर दिखाया था।  लेकिन राइट ब्रदर भले ही इतिहास में फेमस हो लेकिन इनसे पहले भी  दो लोग ऐसे थे जिन्होंने हवाई जहाज जैसी क्रांति कारी खोज की और अपना नाम विश्व विमानन इतिहास में अमर कर लिया पहले खोजकर्ता पहले व्यक्ति ब्राजील निवासी अल्बर्टो सैंटोस डूमोंट ने राइट ब्रदर से  17 दिसम्बर 1901 में एफिल टावर के आस पास सर्वप्रथम इतिहास में कंट्रोल्ड बैलून जहाज़ उड़ाया था।

लेकिन एक व्यक्ति और था जिसे उसके अपने ही देश के  लोगो ने भी भुला दिया पाठ्य पुष्तक में पढ़ाना तो दूर उनके नाम पर शायद आज तक कोई संगोष्ठी भी आयोजित नहीं हुआ। उस वैज्ञानिक का नाम शिवकर बापूजी तलपड़े था जिन्होंने राइट ब्रदर या अल्बर्टो से लगभग 10 साल पहले 1895 मुंबई चौपाटी बिच पर बिना मानव के विमान उड़ा के दिखाया था जो 1500 फिट की उचाई तक उड़ा था।



रामायण के पुष्पक विमान से मिली थी प्रेरणा:-

भारतवर्ष में विमान जहाज कोई आश्चर्य का विषय नहीं था हजारो सालो से भारतीय हवाई जहाज के बारे में काई कहानिया सुनते हुवे बड़े हुवे हैं। उन्ही कहानियो में सबसे प्रसिद्ध और सबसे ज्यादा प्रेरक कहानी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की हैं जिन्होंने त्रेतायुग(आज से लगभग लाखो साल पहले ) में अपनी पत्नी को श्री लंका से पुष्पक नमक विमान द्वारा अयोध्या लेकर आये थे। हर भारतीय के दिल में श्री राम के साथ साथ पुष्पक विमान भी बसता हैं। जबकि 18 वी सदी से पूर्व पुरे विश्व में हवाई जहाज की कोई कल्पना भी नहीं था जब अंग्रेज भारत में आये तो उन्होंने हमारे धर्म ग्रंथो को पढ़ने समझने के लिए संस्कृत भी सीखी।

 लार्ड मकौले ने २५ वर्ष तक संस्कृत में हिन्दू ग्रंथो का अध्यन किया। भारत को ज्ञान रूप से इतना समृद्ध देख कर उसको विस्वास हो गया की बौद्धिक ज्ञान विज्ञान के समृद्धि की वजह से वो लम्बे समय तक भारत को गुलाम बनाने में असफल रहेंगे। अतः उसने हमारे धर्म ग्रंथो में मिलावट तथा झूठी बातो का प्रचार प्रसार करना शुरू किया और राम और पुष्पक विमान को कोरी कल्पना कहना शुरू कर दिया वो कहते की दिखाओ कहा कुछ हवा में उडाता हैं यह रामायण काल्पनिक हैं लेकिन अंग्रेजो ने यह नहीं समझ की कल्पना ही अविष्कार की जननी हैं यदि रामायण के रचनाकार वाल्मीकि की यह कल्पना ही थी तो ऐसा सही कल्पना करने वाला पुरे विश्व में कोई नहीं था।


शिवकर बापूजी तलपड़े ने इस कथित कल्पना को सत्य सिद्ध करने में  कोई कसर नहीं छोड़ी और अंग्रेजो के सामने गुलामी के काल में ही शिवकर बापूजी तलपड़े ने अपने संस्कृत ज्ञान से वेद उपनिषद के ज्ञान से विश्व का सबसे पहला हवाई जहाज बना के दिखा दिया। बचपन से ही मेधावी शिवकर बापूजी तलपड़े का जन्म 1865 ईस्वी में मुंबई में पैदा होने वाले शिवकर बचपन से ही मेधावी क्षात्र में उनकी शिक्षा गुरुकुल में संस्कृत ग्रंथो वेद पुराणों को पढ़ते हुवे बिता बचपन से ही कुछ नया करने की सोचते थे और अपनी पत्नी और गुरु के माध्यम से नए युग में भी सर्वप्रथम हवाई जहाज बना के दिखाने का साहस किया। 


पंडित सुब्बाराय शास्त्री की देख रेख में बनाया पहला हवाई जहाज :-

शिवकर बापूजी तलपड़े के गुरु जी का नाम पंडित सुब्बाराय शास्त्री था उन्ही की देख रेख में तलपड़े जी का संस्कृत, वेद, शास्त्रों आदि का ज्ञान हुआ। महर्षि भरद्वाज द्वारा रचित विमान शास्त्र  से और अपने गुरु के सानिध्य में सफलता पूर्वक हवाई जहाज बना के दिखाया था। अंग्रेजी गुलामी काल में पुरे विश्व में उस समय यह अविष्कार सबसे बड़ा क्रांतिकारी आविष्कार था  जिसके कई अंग्रेज पदाधिकारी भी बने थे। शिवकर बापूजी तलपड़े की पत्नी भी टेक्निकल  विचारो और ज्ञान वाली थी तथा इस अविष्कार में वो शिवकर बापूजी तलपड़े की सहयोगी भी थी।  इस विमान का नाम शिवकर बापूजी तलपड़े ने 'मरुत्सखा' रखा था जिसका अर्थ 'हवा का मित्र' होता हैं। शिवकर बापूजी तलपड़े  मर्क्युरी इंजन का उपयोग अपने विमान में किया था।  




मुंबई  चौपाटी बिच पर उड़ाया  था 'मरुत्सखा' :-

1895 की सुबह से ही चौपाटी बिच पर कोलाहल और भीड़ बढ़ चूका था ऐसा लग रहा था की बिच पर आज कोई बहुत बड़ा उत्सव मानना जाना हैं। शिवकर बापूजी तलपड़े के इस प्रयोग को देखने के लिए अंग्रेजो के साथ साथ कई राजा महाराज तथा जमींदार सम्मिलित हुवे थे। लगभग 3000 की संख्या में लोग इस अविष्कार को देखने के लिए उपस्थित थे इस घटना को बाल गंगाधार तिलक ने अपने पंजाब केसरी के सम्पादकीय में भी जगह दी साथ ही दो अंग्रेज पत्रकार भी वह मौजूद थे और लन्दन के अखबारों में भी यह खबर छपी थी। तत्कालीन भारतीय जज महादेव गोविंदा रानाडे और बरोडा के राज सय्याजी राव गायकवाड़ भी इस घटना के गवाह बने। 



 तलपड़े जी के पत्नी की रहस्यमई मौत हुई :-

अपने सफल आविष्कार के  अंग्रेजो के नजर में शिवकर बापूजी गाड़ने लगे। अंग्रेजो के दबाव के कारन शिवकर बापूजी को मिलने वाले सहयोग धीरे धीरे बंद हो होने लगे फिर भी शिवकर बापूजी उनकी पत्नी और उनके गुरु जी मिल कर अपने अनुसंधान को जारी रखा लेकिन विभिन्न प्रकार के शोषण के कारन उनको अपना शोध बिच में ही रोकना पड़ा तभी शिवकर बापूजी तलपड़े की पत्नी  बड़े ही रहस्य्मय ढंग से हो गई आज तक कोई  जान पाया। पत्नी की  शिवकर बापूजी तलपड़े भी मानसिक रूप से डिप्रेस्ड हो गए और उनकी मृत्यु का भी बहुत अंत हुआ. साथ ही  होनहार वैज्ञानिक इतिहास के पन्नो में सिमट के रह गया। 

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