Chanakya Niti In Hindi First & Second Chapter | चाणक्य नीति हिंदी में

Chanakya Niti In Hindi First & Second Chapter- चाणक्य नीति हिंदी में प्रथम और द्वितीय अध्याय - भारत की भूमि एक महान भूमि हैं यहाँ समय-समय पर एक से बढ़ कर एक विश्वविख्यात आत्माओं ने जन्म लिया। अपने ज्ञान और अपने विलक्षण प्रतिभा से हमेशा से भारतीय महापुरुषों ने सिर्फ भारत को ही नहीं अपितु पूरे विश्व को आदि काल से ही प्रकाशमान करने का कार्य अनवरत रूप से किया हैं। Chanakya Niti.

ऐसे ही एक महान गुरु महान अर्थशास्त्री, राजनितज्ञ और विश्वविख्यात कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य महाराज जी के जीवन परिचय तथा उनके द्वारा रचित चाणक्य नीति पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया हैं यदि आपको अच्छा लगे तो इसे सोशल साइट्स पर शेयर जरूर करे. Chanakya Niti In Hindi.

Chanakya Niti In Hindi First & Second Chapter | चाणक्य नीति हिंदी में
Chanakya Niti In Hindi First & Second Chapter | चाणक्य नीति हिंदी में

Chankya Niti In Hindi

कथित विश्वविजेता सिकंदर को अपनी नीतियों और पड़ोसी राजा पोरस के आपसी सहयोग से धूल चटाने वाले और सिकंदर से भी बड़े सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का निर्माण करने वाले चाणक्य पूरे विश्व मे प्रसिद्ध हैं. उनके द्वारा दिया गया ज्ञान हजारो साल बाद भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने की उस काल मे थे. चाणक्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति आदि ग्रंथों को 21वी सदी में भी बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में मुख्य विषय के रूप में पढ़ाया जाता हैं. Chanakya Niti In Hindi.

ऐसे महान गुरु जिन्होंने सिर्फ दो जोड़ी कपड़ा और एक झोला लेकर पूरे विश्व का सबसे बड़ा साम्राज्य मौर्य साम्राज्य की स्थापना की साथ ही अशोक महान के दादा चंद्रगुप्त मौर्य को सबसे बड़ा सम्राट बनाया. चाणक्य ही वह अकेले व्यक्ति थे जिन्होंने अखंड भारत को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया वह चाणक्य का ही मैनेजमेंट था जिसने भारत को विश्वगुरु और सोने की चिड़िया बनाये रखा.

पूरी तरह मानवी कल्याण के लिए निःस्वार्थ भाव से अपनी तपस्या, ध्यान, गहन अध्यन-चिंतन और जीवनानुभवों द्वारा अर्जित ज्ञान को देना महान भारतीय योगीयों और ऋषि-मुनियों की परम्परा रही हैं. आचार्य चाणक्य ने भी उसी परम्परा का पूरी ईमानदारीपूर्वक निर्वहन किया मानव के कल्याण के लिए उन्होंने चाणक्यनीती का सूत्रपात किया. Chanakya Niti In Hindi.

आचार्य चाणक्य ने अपनी रचना द्वारा मित्रों की सही पहचान करने से लेकर दुश्मनो को पहचानने का तरीका बताया हैं साथ ही पति-परायण और चरित्रहीन महिलाओ के भी लक्षण को अपने गहन अध्यन द्वारा चाणक्य निति में बताया हैं. राजा का कर्त्वय प्रजा के अधिकार जैसे विषयों पर भी प्रकाश डालने का सफल प्रयास किया हैं.

Chanakya Niti First Chapter In Hindi-

१.  तीनो लोको के स्वामी सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु  को नमन करते हुए मै एक राज्य के लिए  नीति  शास्त्र  के सिद्धांतों  को कहता हूँ.  मै यह सूत्र अनेक शास्त्रों का आधार ले कर कह रहा हूँ. 

 2. जो व्यक्ति शास्त्रों के सूत्रों का अभ्यास करके ज्ञान ग्रहण करेगा उसे अत्यंत वैभवशाली कर्तव्य के सिद्धांत ज्ञात होगे। उसे इस बात का पता चलेगा कि किन बातों का अनुशरण करना चाहिए और किनका नहीं. उसे अच्छाई और बुराई का भी ज्ञात होगा और अंततः उसे सर्वोत्तम का भी ज्ञान होगा. 

३. इसलिए लोगो का भला करने के लिए मै उन बातों को कहूंगा जिनसे लोग सभी चीजों को सही परिपेक्ष्य मे देखेगे.

४. एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है यदि वह किसी मुर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अतयंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता है.

Chanakya Niti First Chapter In Hindi
                                                                  Chanakya Niti First Chapter In Hindi


५. दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास साक्षात् मृत्यु के समान है.

Chanakya Niti In Hindi
Chanakya Niti In Hindi


६ . व्यक्ति को आने वाली मुसीबतो से निबटने के लिए धन संचय करना चाहिए. उसे धन-सम्पदा त्यागकर भी पत्नी की सुरक्षा करनी चाहिए। लेकिन यदि आत्मा की सुरक्षा की बात आती है तो उसे धन और पत्नी दोनो को तुक्ष्य समझना चाहिए.

७ .भविष्य में आने वाली मुसीबतो के लिए धन एकत्रित करें. ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी? जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेजी से घटने लगता है.

चाणक्य नीति हिंदी में प्रथम अध्याय

८.  उस देश मे निवास न करें जहाँ आपकी कोई ईज्जत नहीं हो, जहा आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहा आपका कोई मित्र नहीं और जहा आप कोई ज्ञान आर्जित नहीं कर सकते.

९ . ऐसे जगह एक दिन भी निवास न करें जहाँ निम्नलिखित पांच ना हो:- एक धनवान व्यक्ति , एक ब्राह्मण जो वैदिक शास्त्रों में निपुण हो, एक राजा, एक नदी , और एक चिकित्सक.

१० .  बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे देश में कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ : रोजगार कमाने का कोई माध्यम ना हो, जहा लोगों को किसी बात का भय न हो, जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो, जहा लोग बुद्धिमान न हो,और जहाँ लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो.

Chanakya Niti In Hindi
Chanakya Niti In Hindi

११ . नौकर की परीक्षा तब करें जब वह कर्त्तव्य का पालन  न कर रहा हो, रिश्तेदार की परीक्षा तब करें जब आप मुसीबत मे घिरें हों, मित्र की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों मे करें, और जब आपका वक्त अच्छा न चल रहा हो तब पत्नी की परीक्षा करे.

१२ . अच्छा मित्र वही है जो हमे निम्नलिखित परिस्थितियों में नहीं त्यागे: आवश्यकता पड़ने पर, किसी दुर्घटना पड़ने पर, जब अकाल पड़ा हो, जब युद्ध चल रहा हो, जब हमे राजा के दरबार मे जाना पड़े, और जब हमे समशान घाट जाना पड़े.

Chanakya Niti In Hindi
Chanakya Niti In Hindi


१३ . जो व्यक्ति कसी नाशवंत चीज के लिए कभी नाश नहीं होने वाली चीज को छोड़ देता है, तो उसके हाथ से अविनाशी वस्तु तो चली ही जाती है और इसमे कोई संदेह नहीं की नाशवान को भी वह खो देता है.

१४ . एक बुद्धिमान व्यक्ति को किसी इज्जतदार घर की अविवाहित कन्या से किस वयंग होने के बावजूद भी विवाह करना चाहिए। उसे किसी हीन घर की अत्यंत सुन्दर स्त्री से भी विवाह नहीं करनी चाहिए. शादी-विवाह हमेशा बराबरी के घरो मे ही उिचत होता है.

१५ . इन ५ पर कभी विश्वास ना करें : १. नदियां, २. जिन व्यक्तियों के पास अश्त्र-शस्त्र हों, ३. नाख़ून और सींग वाले पशु, ४. संस्कारहीन औरतें  ५. राज घरानो के लोगो पर.

१६ . अगर हो सके तो विष मे से भी अमृत निकाल लें, यदि सोना गन्दगी में भी पड़ा हो तो उसे उठाये, धोएं और अपनाये, निचले कुल मे जन्म लेने वाले से भी सर्वोत्तम ज्ञान ग्रहण करें, उसी तरह यदि कोई बदनाम घर की कन्या भी महान गुणो से संपनन है और आपको कोई सीख देती है तो गहण करे.

१७ .  महिलाओं में पुरुषों कि अपेक्षा: भूख दो गुना, लज्जा चार गुना, साहस छः गुना, और काम आठ गुना होती है.

Chanakya Niti Second Chapter In Hindi.

1. झूठ बोलना, कठोरता, छल करना, बेवकूफी करना, लालच, अपवित्रता और निर्दयता ये औरतो के कुछ नैसर्गिक दुर्गुण हैं.

2. भोजन के योग्य पदार्थ और भोजन करने की क्षमता, सुन्दर स्त्री और उसे भोगने के लिए काम शक्ति, पर्याप्त धनराशि तथा दान देने की भावना - ऐसे संयोगो का होना सामान्य तप का फल नहीं हैं.

Chanakya Niti Second Chapter In Hindi
                                                                  Chanakya Niti Second Chapter In Hindi


3.उस व्यक्ति ने धरती पर ही स्वर्ग को पा लिया हैं :
 1. जिसका पुत्र आज्ञाकारी हैं,  
 2. जिसकी पत्नी उसकी इच्क्षा के अनुरूप व्यवहार करती हैं,
 3. जिसे अपने धन पर संतोष हैं.

4. पुत्र वही हैं जो पिता का कहना मानता हो, पिता वही हैं जो पुत्रों का पालन-पोषण करे, मित्र वही है जिस पर विश्वास कर सकते हो और पत्नी वही हैं जिससे सुख प्राप्त हो.

Chanakya Niti Second Chapter In Hindi
                                                               Chanakya Niti Second Chapter In Hindi


5. ऐसे लोगो से बचे जो आपके मुँह पर तो मीठी बातें करते हैं, लेकिन आपके पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते हैं,ऐसा करने वाला तो उस विष के घड़े के समान हैं जिसके ऊपरी सतह दूध से भरी हैं.

6. एक बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास ना करे. एक अच्छे मित्र पर भी विस्वास ना करें. क्युकी यदि ऐसे लोग आपसे रुष्ट होते हैं तो आप  राज से पर्दा खोल देंगे.



7. मन में सोचे हुए कार्य को किसी के सामने प्रकट न करे. बल्कि मनन पूर्वक उसकी सुरक्षा करते हुए उसे कार्य में परिणित कर दें.

चाणक्य निति हिंदी में द्वितीय अध्याय

8. मूर्खता दुखदायी हैं, जवानी भी दुखदायी हैं, लेकिन इन सबसे ज्यादा दुखदायी किसी के घर जाकर उसका अहसान लेना हैं.

9. हर पर्वत पर माणिक्य नहीं होते, हर हाथी के सर पर मणी नहीं होता, सज्जन पुरुष भी हर जगह नहीं होते और हर वन में चन्दन के वृक्ष भी नहीं होते हैं.

10. बुद्धिमान पिता को अपने पुत्रों को शुभ गुणों की सिख देनी चाहिए क्युकी नीतिज्ञ और ज्ञानी व्यक्तियों की ही कुल में पूजा होती हैं.

11. जो माता व पिता अपने बच्चो को शिक्षा नहीं देते हैं. वो तो बच्चों के शत्रु के सामान हैं. क्युकी वे विद्याहीन बालक विद्वानों की सभा में वैसे ही तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसो में बगुले.

12. लाड-प्यार से बच्चों में गलत आदते ढलती हैं, उन्हें कड़ी शिक्षा देने से वे अच्छी आदते सीखते हैं. इसीलिए बच्चो को जरुरत पड़ने पर दण्डित करें, ज्यादा दुलार ना करे.

चाणक्य नीति हिंदी में
चाणक्य नीति हिंदी में


13. ऐसा एक भी दिन नहीं जाना चाहिए जब आपने एक श्लोक, आधा श्लोक, चौथाई श्लोक या श्लोक का केवल एक अक्षर नहीं सीखा, या आपने दान, अभ्यास या कोई पवित्र कार्य नहीं किया.

14. पत्नी का वियोग होना, अपने ही लोगो से बे इज्जत होना, बचा हुआ ऋण, दुष्ट राजा की सेवा करना, गरीबी एवं दरिद्रों की सभा- ये छह बातें शरीर की बिना अग्नि के ही जला देती हैं.

15. नदी के किनारे वाले वृक्ष, दूसरे व्यक्ति के घर में जाने अथवा रहने वाली स्त्री एवं बिना मंत्रियों का राजा - ये सब निश्चय ही शीघ्र नष्ट हो जाते हैं. 

16. एक ब्राह्मण का बल तेज और विद्या हैं, एक राजा का बल उसकी सेना में हैं, एक वैश्य का बल उसकी दौलत में हैं तथा एक शूद्र का बल उसकी सेवा परायणता में हैं.



17. वेश्या को निर्धन व्यक्ति का त्याग कर देना चाहिए, प्रजा को पराजित राजा का त्याग कर देना चाहिए, पक्षियों को फल रहित वृक्ष को त्याग देना चाहिए एवं अतिथियों को भोजन करने के पश्चात् मेजबान के घर से निकल जाना चाहिए.

18.  ब्राह्मण दक्षिणा मिलने के पश्चात् अपने यजमान को छोड़ देते हैं, विद्वान विद्या प्राप्ति के बाद गुरु को छोड़ जाते हैं और पशु जले हुवे वैन को त्याग देते हैं.

19. जो व्यक्ति दुराचारी, कुदृष्टि वाले, एवं बुरे स्थान पर रहने वाले मनुष्य के साथ मित्रता करता है, वह शीघ्र नष्ट हो जाता हैं.

20. प्रेम और मित्रता बराबर वालो में अच्छी लगती हैं, राजा के यहाँ नौकरी करने वाले को ही सम्मान मिलता हैं, व्यवसायों में वाणिज्य सबसे अच्छा हैं, एवं उत्तम गुणों वाली स्त्री अपने घर में सुरक्षित रहती हैं.

Chanakya Niti In Hindi
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