अपनी 63 पत्नियों को शक की वजह से मारने वाला दुष्ट बादशाह

भारत में मुग़ल काल के समय एक ऐसा दुष्ट मुस्लिम बादशाह भी हुआ हैं जिसने अपनी 63 पत्नियों को युद्ध में जाने से पहले सिर्फ इसलिए मार देता है की कही उसकी पत्नियाँ उसके मरने के बाद दूसरी शादी ना कर ले। जी हाँ आपने एक दम ठीक पढ़ा भविष्य में होने या ना वाले कर्म का इतना क्रूर सजा आज ही दे देना शायद इतिहास में ना कभी हुआ होगा और ना ही कभी होगा। आज हम उस पागल बादशाह के बारे में बताएँगे जिसने अपनी 63 पत्नियों को कब्र में सुला दिया था आज भी भारत में वह जगह 7 कब्र के नाम से प्रसिद्ध है और दूर दूर से लोग उसे देखने भी आते हैं।


कर्णाटक के बीजापुर में स्थित है साठ कब्र:- 

वैसे तो कर्णाटक के बीजापुर स्थित बहुत ही दर्शनीय स्थान हैं लेकिन बीजापुर अठानी रोड पर लगभग 5 किलोमीटर दूर एक उजाड़ स्थान पर पाँच एकड़ में फैली यह ऐतिहासिक सात कब्र नामक स्थान कुछ ज्यादा ही चर्चित हैं। यह सात कब्र कभी साठ कब्र से चर्चित था लेकिन समय के साथ साथ इतिहास  मिटाने के क्रम में साठ कब सात बन गया किसी को कानो कान खबर नहीं लगी।

आदिलशाह सल्तनत के सेनापति अफजल खान की 63 पत्नियाँ थी। महाराज क्षत्रपति शिवाजी के कार्यकाल में अफजल खान को अपने मृत्यु का भय हमेशा सताता रहता था इसीलिए एक उसके मन में ऐसा विचार आया की यदि मै शिवाजी द्वारा कभी अचानक मारा जाऊ तो मेरी पत्नियां कही दूसरी शादी ना कर ले इस आशंका को रोकने के लिए उसने अपनी सभी 63 पत्नियों की हत्या कर 63 कब्र में हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिया।





63 पत्नियों के हत्या का तरीका:-

अफजल खान ने अपनी पत्नियों की हत्या किस तरीके से की थी इस पर अलग अलग इतिहासकारो का अलग अलग मत हैं कुछ इतिहासकारो का  कहना हैं की उन्हें जिन्दा कब्र में दफना दिया गया था तो किसी दूसरे इतिहासकार का कहना हैं उन्हें अफजल खान ने खुद अपने तलवार से काट कर हत्या की थी। 63 में तीन पत्निया भागने के प्रयास में अफ़ज़ल के सैनिको द्वारा पकड़ी गई और अलग अलग जगहों पर उनको दफनाया गया था। 
इसीलिए बीजापुर में सिर्फ साठ ही कब्र हैं। 


अपने लिए भी खुदवाई थी कब्र 

बीजापुर स्थित इस कब्रगाह में पहली दो लाइनों में 7-7 कब्र फिर तीसरी लाइन में 5 कब्रें तथा आखिरी के चारो लाइनों में 11 कब्रे आज भी मौजूद हैं। कब्रगाहो की ऐसी संरचना के पीछे क्या कारण हो सकता हैं यह तो अफजल खान ही जाने। अफजल खान ने अपने लिए भी एक कब्र खुदवाई थी ताकि मरने के बाद उसका शव भी वही दफनाया जा सके लेकिन ऐसा नहीं हो पाया उसकी लाश कब्र तक नहीं पहुँच सकी।



1659 में क्षत्रपति शिवाजी जी ने किया था वध :-

मराठा वीर योद्धा शिवाजी उस समय के पराक्रमी योद्धा थे। गोरिल्ला नामक युद्ध कौशल की खोज करने वाले क्षत्रपति शिवाजी के डर से मुग़ल सल्तनत थर थर कापते थे। हिन्दू हृदय सम्राट वीर शिवजी ने अपना पूरा जीवन धर्म की रक्षा करते हुवे बिता दिया। इतनी संकुचित मानसिकता वाला अफजल खान आखिर कब तक महान योद्धा शिवाजी से बचता रहता और 1659 में महाराज क्षत्रपति शिवाजी ने अफजल खान का वध प्रताप गढ़ किले में किया था। अफजल खान का शव अपने द्वारा खुदवाई गई कब्र तक नहीं पहुँच सका अफजल खान को प्रतापगढ़ किले में ही दफना दिया गया। 




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