Environment: जानिए तीन पर्यावरण प्रेमियों के बारे में जिन्होंने अकेले लगा दिए हैं लाखो पेड़।

Environment क्या आप भी पर्यावरण प्रेमी हैं तो जानिए तीन पर्यावरण प्रेमियों के बारे में जिन्होंने अकेले लगा दिए हैं लाखो पेड़। मनुष्य अपने जीवन में बहुत कार्यो के लिए पेड़ो का उपयोग करता हैं और करना भी आवश्यक हैं लेकिन उतने ही जिम्मेदारी से पेड़ो का सरक्षण तथा संवर्धन भी होना चाहिए।

"जब भी मरोगे एक पेड़ लेके जलोगे,पर्यावरण का ये कर्ज उतार दो यारो,
जीतेजी कुछ पेड़ तो लगा दो यारो"

यह वृक्ष हैं तभी हम आप और हमारी दुनिया है यदि वृक्ष नहीं तो जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं। जिस प्रकार मनुष्य के शरीर में हृदय कार्य करता हैं ठीक उसी प्रकार वायुमंडल का ह्रदय यह पेड़ हैं यदि हृदय कमजोर होगा तो पूरी प्रणाली ही कमजोर हो  जाएगी इसीलिए हम सभी को पर्यावरण का कर्ज उतार देना चाहिए और मरने से पहले कुछ पेड़ तो जरूर लगा देना चाहिए।  

पृथ्वी पर  सबसे बुद्धिमान यदि कोई जिव हैं तो वह मनुष्य हैं और कही न कही ये सभी प्राणी एक ऐसा माहौल या पर्यावरण का निर्माण करते हैं जिसमे सभी जीवित रह सके पृथ्वी पर यदि जीवन का नामोनिशान हैं तो वह सिर्फ और सिर्फ इसी पर्यावरण की वजह से हैं। यह मनुष्य की जिम्मेदारी हैं की वह इस पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन करें। इस पर्यावरण के अंदर सभी जिव जंतु आते हैं। नदी, पहाड़, जंगल ये सभी जीवित प्राणी हैं इनका संरक्षण अति आवश्यक हैं सभी प्रकार के जीवन के लिए। 

लेकिन बेहद दुःख की बात हैं मनुष्य ने अपनी जिम्मेदारी को भूल अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु सतत विकास के नाम पर पर्यावरण का युद्ध स्टार पर दोहन किया हैं जिन शिक्षा पद्धति ने सतत विकास को अपना धर्म समझा उसे भुला दिया गया और जिस शिक्षा पद्धति ने सतत विकास को ठेंगा दिखाते हुवे उद्योगिकीकरण और विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया हैं उसी शिक्षा  पद्धति का बोल बाला हैं। हमने एयर प्यूरीफायर या वाटर प्यूरीफायर मशीन का तो खोज कर लिया लेकिन प्राकृतिक प्यूरीफायर पेड़ तथा औसधियो को जान बुझ कर भुला दिया क्युकी ये मुफ्त के हैं इनसे कंपनी को फायदा नहीं होगा। यह शिक्षा पद्धति एक षड्यंत्र हैं इस पर्यावरण को दूषित प्रदूषित करने का। 

फिर भी कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी असली जिम्मेदारियों को समझा हैं सतत विकास के मूल मंत्र को नहीं भुला हैं और पृथ्वी को हरा भरा बनाने में पृथ्वी को स्वर्ग बनाने में अपना जीवन लगा दिया हैं। ऐसे ही महान पर्यावरण प्रेमियों की वजह से पृथ्वी पर अभी भी शुद्ध ऑक्सीजन का निशान हैं अभी भी कही कही नदियाँ स्वच्छ हैं। आइये आज ऐसे ही 10 पर्यावरण प्रेमियों को और उनके योगदान की चर्चा करते हैं।

The Tree Loving cop from Kerla Source: Hindustaan
The Tree Loving cop from Kerla Source: Hindustan Times

केरला के वृक्ष प्रेमी पुलिस जिन्होंने अकेले लगा दिए है लाखो पेड़ :

केरल में लाखो पेड़ो को सड़क किनारे लगाने वाले पुलिस अधिकारी का नाम वि विद्याधरन हैं। श्री विद्याधरन का पेड़ो के प्रति प्रेम यंग ऐज में हो गया बाद में यह प्रेम ही उनकी जिंदगी बन गई हैं। श्री विद्याधरन अपने साथ हमेशा गाडी में कुछ पौधे रखते हैं उन्हें उचित जगह देख कर सड़क किनारे लगा देते हैं।  

श्री विद्याधरन ने इतने ज्यादा पेड़ लगा दिए हैं की पिछले 40 सालो की वृक्षों की गिनती भूल चुके हैं फिर भी उनका कहना हैं की उन्होंने लगभग एक लाख से ज्यादा पेड़ो को लगाया हैं और उनकी देख भाल भी की हैं।  केरल के दक्षिणी भाग के दो जिलो अलपुज़हा और एर्नाकुलम जिलों के सड़क के किनारे लगे घने पेड़ो को देख कर आप कह सकते हैं की विद्याधरन सही आँकड़ा दे रहे हैं। 

दो साल पहले श्री विद्याधरन ने अपने  में आए अतिथियों को 20000 से ज्यादा पौधों को उपहार स्वरुप भी दिया।  श्री विद्याधरन कहते हैं की "किसी भी छोटे से छोटे जिव में भी बहुत जीवन होता हैं और आप सभी जीवो प्राणियों में भगवान् का अनुभव कर सकते हैं। जब भी मै सुनता हूँ की मेरे लगाए पेड़ो की छाव में यात्री आराम करते हैं या मेरे लगाए पेड़ो के फलो को बच्चे खाते हैं उनके छाँव के खेलते कूदते हैं तो मुझे अत्यंत ही ख़ुशी होती हैं ऐसी ख़ुशी किसी और चीज से नहीं हो सकती। इन पेड़ो में मुझे भगवान् का अनुभव होता हैं यह पेड़ मेरे लिए भगवान् हैं इसीलिए मैं इनसे बहुत प्रेम करता हूँ। "  


The Forest Man of India: Jadav Molai Payeng
The Forest Man of India: Jadav Molai Payeng


असाम के जादव ने अकेले 1360 एकड़ जमीन पर लगा दिया जंगल :-

भारत के फॉरेस्ट मैन के नाम से प्रसिद्ध असाम के जादव मोलई पेयांग जब मात्र 16 साल के थे तभी से जिव कल्याण के प्रति पर्यावरण संरक्षण के प्रति उन्होंने कार्य करना प्रारम्भ कर दिया।  1979 में जब उन्होंने देखा की सैकड़ो की सँख्या में साँप छाँव  अभाव में मर रहे हैं तब उन्होंने सापो के संरक्षण के लिए 50 अलग अलग पेड़ और 25 बाँस का पेड़  शुरुआत की। 

बाढ़ से बचने के लिए तथा जंगली जानवरो को रहने के लिए जादव ने बहुत सरकारी सहायता मांगी ताकि पेड़ो को भरी मात्रा लगाया जा सके सरकार ने उनकी कोई सहायता नहीं की और बोला की जाओ खुद पेड़ लगाओ। जादव ने ब्रह्मपुत्र किनारे बंजर पड़े टापू पर अकेले पेड़ लगाना शुरू किया वो  नियमित पेड़ो के बीजो को लगाने लगे। और कई सालो की मेहनत का फल यह मिला की लगभग 1360 एकड़ जमीन पर जादव ने अकेले एक घना जंगल बना दिया। 

जादव द्वारा लगाए गए इस जंगल की वजह से हजारो प्राणियों की जान तो बची ही उनको हमेशा के लिए घर भी मिला। जादव द्वारा लगाए गए इस जंगल में आज कई बंगाल टाइगर, गेंडा, 100 ज्यादा हिरण हजारो सापो का घर बन चुका साथ ही हजारो चिडियो  चहचहाट ने उस बंजर वीरान टापू पर एक नई जिंदगी की कहानी लिख रही हैं यह सब सिर्फ सिर्फ एक महापुरुष जादव मिलाई पेयांग की वजह से मुमकिन हो पाया हैं।  

अकेला आदमी जिसने राजस्थान के बंजर जमीन पर उगा दिए 27 हजार पेड़ :

राजस्थान में रहने वाले विश्नोई समाज हमेशा से अपने प्रकृति प्रेम के लिए प्रसिद्ध रहा हैं। तीव्र गति से बढ़ रहे जनसँख्या की वजह से तथा संसाधनों के दोहन की वजह से पेड़ो की अन्धाधुन कटाई चल रही हैं। पेड़ो के इस कटाव के बहुत ही दुष्परिणाम भी मानव जाती को भुगतना पड़ रहा हैं। पृथ्वी के ताप में बेतहासा बढ़ोतरी या वायुमंडल में प्राणवायु के लगातार गिरते स्तर पेड़ो  कटाई के फल हैं। 

श्री राणाराम विश्नोई जो की इसी विश्नोई समाज से आते हैं उन्होंने प्रकृति के प्रति  जिम्मेदारी को समझा  राजस्थान के बंजर भूमि पर लगभग 27 हजार पेड़ लगाया भी उनको समय समय पर पानी खाद दे कर उन पेड़ो का सरक्षण और संवर्धन भी कर रहे हैं। ऐसे प्रकृति पुत्र ही हमारे असली आदर्श होने चाहिए, हमारे प्रेरणास्रोत होने चाहिए। हम सभी को विश्नोई जी से प्रेरणा लेनी चाहिए और जितना हो सके पेड़ लगाना चाहिए और दुसरो को भी प्रोत्साहित करना चाहिए।  

75 वर्षीय श्री राणाराम विश्नोई जोधपुर में रहते हैं और आज भी पुरे जोश के साथ सबसे धर्म का कार्य पुरे मनोबल के साथ कर रहे हैं। श्री राणाराम विश्नोई यह पुण्य का कार्य पिछले 50 सालो से अनवरत करते चले आ रहे हैं। पेड़ो को लगाने के साथ साथ श्री विश्नोई उनकी सिचाई और देख रेख भी बिलकुल अपने पुत्र की तरह करते हैं। 

Source: Twitter 
राणाराम विश्नोई के अनुसार पुरे जीवन में उन्होंने अभी तक लगभग 27 हजार से ज्यादा पेड़ो को लगाया और उनकी सुरक्षा की हैं।  27 हजार आकड़ा अपने आप में एक बहुत ही बड़ी संख्या हैं खास कर इतने संख्या में जब पेड़ लगाने की बात हो। राणाराम पेड़ो को लगाने के बाद इन्हे छोड़ नहीं देते हैं बल्कि विश्नोई जी के पास एक ऊंट वाली गाडी हैं जिसपर वो छोटा सा पानी का टैंकर ले कर चलते हैं और मटके से सभी लगाए हुवे पेड़ो को समय समय तक पानी देते हैं। श्री विश्नोई पेड़ो को तब तक पानी देते हैं और देख रेख करते हैं जबतक उस पेड़ का जड़ मजबूत नहीं हो जाता और खुद जमीन से अपने लिए पानी सोखना शुरू नहीं कर देता।  

श्री विश्नोई जी का यह कार्य पुरे जोधपुर शहर में एक मिसाल हैं। इस पुनीत कार्य की वजह से समाज में बिश्नोई जी को खुद आदर सम्मान की नजरो से देखा जाता हैं। सरकारी अधिकारी भी विश्नोई जी को बहुत पसंद करते है और कहते हैं की विश्नोई जी ने जो कार्य कर दिखाया हैं वो सरकार के लिए  प्रेरणा की बात हैं।  बड़े बड़े सरकार भी लाखो करोडो रुपया खर्च करने के बाद भी ऐसी उपलब्धि नहीं पाई हैं जितनी की राणाराम विश्नोई की निरंतर मेहनत ने प्राप्त कर लिया हैं। 


यदि सबसे बड़ा धर्म का कार्य कुछ हो सकता हैं तो वह हैं किसी भूखे को खाना खिलाना और यह वायुमंडल भूखा हैं स्वच्छ हवा का, ये नदियाँ भूखी हैं अविरल धारा और स्वच्छ जल का, ये भूमि भूखी हैं पेड़ो के शीतल छाँव का, यह पहाड़ भूखा हैं शीतल हवा का, किसान भूखा हैं सही समय उचित मात्रा में बारिश का, पिंजरे में बंद चिड़िया भूखी हैं उन्मुक्त गगन का चिड़ियाघर में कैद शेर भूखा हैं खुला पठार में स्वतंत्रता से दहाड़ने का आइये आज अभी इसी वक्त हम यह प्रण ले की यह प्रकृति हमारी माँ हैं और हम अपनी माँ को भूखा नहीं रहने देंगे हम पेड़ो का दोहन नहीं होने देंगे हम पेड़ लगायेंगे, हम नदियों के जल को दूषित नहीं करेंगे और दूषित होने से बचाएँगे, हम जानवरो पर दया करेंगे और सबसे बड़ा धर्म करेंगे प्रकृति का संरक्षण तथा संवर्धन करेंगे।    

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